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तीन तलाक और चार विवाह किसी का अधि‍कार नहीं जानें, आखिर मुसलमान क्या सोचते हैं योगी आदित्यनाथ के बारे में?

  • by Rashi
  • 9 Months ago
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गोरखपुर. योगी आदित्‍यनाथ ने कहा है कि‍ तीन तलाक और चार विवाह किसी का अधि‍कार नहीं है। उन्‍होंने फिल्‍म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्‍यप के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए बयान पर तल्‍ख टिप्‍पणी की। उन्‍होंने तीन तलाक का विरोध करने वालों को आड़े लिया। वहीं अनुराग कश्‍यप को देश से माफी मांगने के लिए भी कहा। वहीं उन्‍होंने वाराणसी की दुर्घटना को प्रशासनिक दुर्व्‍यवस्‍था का परिणाम बताया। उन्‍होंने और क्‍या कहा…

सोमवार को गोरखपुर खाद कारखाना में हिंदुस्‍तान उर्वरक और रसायन लिमिटेड के शुभारंभ पर योगी आदित्‍यनाथ ने तीन तलाक का विरोध करने वालों पर कमेंट कि‍या।
उन्‍होंने कहा कि‍ इस मामले को न्‍यायालय देख रही है। सभी पक्षों से राय मांगी है।
उन्‍होंने कहा कि‍ यह समझ में नहीं आ रहा है कि‍ आखिर इसको लेकर विवाद क्‍यों है। उन्‍होंने कहा कि क्‍या एक बड़ी आबादी को आज भी आप न्‍याय से वंचित करेंगे। तीन तलाक और चार विवाह का जो मामला है यह एक विवादित मामला है। न्‍यायालय को इस पर निष्‍पक्ष कार्य करने दिया जाना चाहिए। सरकार को भी इस मामले में कम से कम मुस्लिम महिलाओं के पक्ष को स्‍पष्‍ट रखना चाहिए। किसी भी सभ्‍य समाज में तीन तलाक और चार विवाह किसी का अधिकार नहीं हो सकता।

योगी आदि‍त्‍यनाथ ने कहा कि‍ तमाम मुस्लिम देशों ने इस प्रकार की कुप्रथाओं को रोका है तो आखिर भारत में क्‍यों नहीं रोका जाना चाहि‍ए? उन्‍होंने कहा कि यहीं से समान नागरिक संहिता की बात शुरू होती है। वास्‍तव में राष्‍ट्र की व्‍यवस्‍था एक विधान, एक निशान और एक प्रधान से चलेगी और मुझे लगता है कि समान नागरिक संहिता के बारे में व्‍यापाक राष्‍ट्रहित में विचार किया जाना चाहिए। मुस्लिम महिलाओं का विरोध उलेमाओं को रास नहीं आने के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्र की व्‍यवस्‍था संविधान से चलेगी और किसी निजी कानून से नहीं। व्‍यक्तिगत कानून लोगों के अपने व्‍यक्तिगत कार्यों के लिए हो सकते हैं। शादी-विवाह एक व्‍यक्तिगत कार्य नहीं है, बल्कि सामाजिक कार्य है। समाज की आधारशिला है। उन्‍होंने कहा कि‍ पूरे देश को एक कानून के साथ देखा जाना चाहिए और समान नागरिक कानून आज देश की आवश्‍यकता है।

मुसलमानों का कहना है कि जहां तक अटल बिहारी वाजपेयी साहब की शख्सियत का ताल्लुक है, उनका मुकाबला किया ही नहीं जा सकता है. ग्वालियर की बजाय उनको लखनऊ का ही कहा जाए, तो बेहतर होगा. यहां की संस्कृति और रहन-सहन के लिए वह बेमिसाल थे. अटल जी को मुसलमान भी वोट दे चुके हैं. देखिए योगी आदित्यनाथ के लिए हम कहेंगे कि इंसान अच्छा-बुरा नहीं होता है, जो उनकी बॉडी लैंग्वेज है, जो कट्टरता है, उससे लगता है कि यही सही है. पर हमने सुना है कि वह गोरखनाथ के हैं और गोरखपुर में उनके इलाके में जो दुकाने हैं, वह मुसलमान की हैं. हमारा कहना यह है कि आप किसी को डरने की जरूरत नहीं. अब इनको ‘सबका साथ सबका विकास’ की राह पर चलना पड़ेगा. मुस्लिमों ने भी बीजेपी को वोट दिया है.

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